यूपी में चेकिंग के नाम पर पुलिसिया तानाशाही या यू कहें गुंडई ...

रिपोर्ट---गोपाल सिंह 

 


 


यूपी के हाथरस से जो खबर आ रही है उसे देख कर दिल मे ख़ौफ़ पैदा हो गया क्योंकि आम तौर पर देखा जाता है कि जब पुलिस वाहन चेक करती है तो कितने ही लोग उनसे बचते हुए निकलने का प्रयास करते हैं कुछ इसलिए के उन्हें कहीं पहुंचने की जल्दी होती है तो कुछ इसलिए क्योंकि वो जानते हैं कि अगर पुलिस के हत्थे चढ़ गए तो किसी ना किसी बहाने या तो चालान कटेगा या उनकी जेब ढीली हो कर ही रहेगी।



 


 


सिर पर लगा कि बाइक सवार वही बेहोश हो कर गिर पड़ा बताइये जो पुलिस पहले पहिये के आगे डंडा लगा कर गाड़ी रोकती थी वो अब हमलावर हो गई है आखिर क्यों क्या उनके ऊपर भी कोई दबाव है ये बड़ी बात है अगर ऐसा है तो यहाँ गुंडई पुलिस के बड़े अधिकारी कर रहे हैं ऐसा कहना गलत नही होगा।

 


 

आप प्रदेश की राजधानी लखनऊ का ही नजारा देख लीजिए पुलिस वालों को चालान काटने का इतना नशा हो गया है कि सुबह हो या शाम दोपहर हो या रात किसी भी समय कुर्सी लगा कर बैठे नज़र आ ही जाते हैं एक साहब सुबह आईटी चौराहे पे बिना हेलमेट लगाए जा रहे थे तभी वहां के चौकी इंचार्ज ने उनको रोका और चालान की रसीद थमा दी उनकी गलती यही थी कि सुबह की ठंडी हवा का वो आंनद लेते हुए जा रहे थे और हेलमेट दिग्गी में रखा था जो पुलिस वाले देखना नही चाह रहे थे।


 


 

वैसे तो हमारे डीजीपी साहब का एक मैसेज भी खूब वायरल हुआ है जिसमे कहा गया है कि लोगो को बेवजह परेशान ना किया जाए सभी को ये हिदायत दी जाती है लेकिन लगता है उनकी बातों का भी कोई असर इन खाकी धारकों पर नही पड़ रहा हो सकता है ये ऊपर से नीचे तक की मिली भगत हो कि जनता को हम दुलारते रहेंगे तुम परेशान करते रहो नही तो तुम्हारा तबादला।हम ये नही कहते कि आप चेकिंग अभियान ना चलाइये आप ज़रूर चलाइये लेकिन लोगो की बात भी तो सुनिए मानवता को ताक पे रख कर खाकी का ख़ौफ़ दिखाने का क्या मतलब है एक तो पहले से आम आदमी खाकी से सहमा हुआ नजर आता है उस पर से इस तरह की खबरें उसे डरा देती है क्या करे आम आदमी घर से निकलना छोड़ दे या यूपी छोड़ दे जहां की पुलिस उसे बेजा परेशान करती है।

 


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