बंगाल के नेता मौज में जनता बोल रही त्राहि माम त्राहि माम......
खास रिपोर्ट---रज़िया बानो खान

 


 

2019 में जो हुआ उसे भूल जा अब तो 21 की तैयारी है,......जी हां यही तैयारी बंगाल को खून की होली खिलवा रही है और तैयारी किसकी,.........है तो राजनैतिक दलों की तो ज़िम्मेदार कौन,.........वहां की सियासत और सियासतदार,.......मगर इन सब मे पिस कौन रहा है,......तो इसका सीधा जवाब बंगाल की मासूम जनता,.........!!!!!

 


 

बंगाल में जब से ममता बनर्जी की सरकार बनी है तभी से उनकी सरकार पर पक्षपात का आरोप लगता आया है। आरोप लगता है कि वो मोहर्रम को ज़्यादा तवज़्ज़ो देती हैं और दुर्गा पूजा पर रोक लगाती है जो के कभी बंगाल का सबसे प्रसिद्ध और प्रतिष्ठित त्योहार माना जाता था। बस इसी बात को भाजपा ने अपना एजेंडा बनाया और अपनी लोकसभा सीटों में बढोत्तरी कर ली। अब यही बढ़त टीएमसी के गले नही उतर रही जिसका नतीजा अब खून और आतंक का गढ़ बनता जा रहा है बंगाल।

 


 

बंगाल में टीएमसी और भाजपा कार्यकर्ताओं की इन दिनों हत्याएं हो रही हैं लेकिन वहां की सरकार 2021 विधान सभा के चुनाव की तैयारी में जुटी दिखाई दे रही है। कानून व्यवस्था चौपट है मुह से बड़ी बड़ी बातें हो रही हैं और तो और बंगाल में राष्ट्रपति शासन न लग जाये इसका डर भी सता रहा है। जिसमे किसी को नुकसान तो किसी को फायदा नज़र आ रहा है सवाल बस इतना ही है,.... कि,.....सत्ता की लालच में निर्दोषों का खून क्यों बहाया जा रहा है और आखिर लोकतंत्र का गला क्यों घोंटा जा रहा है?

 


 

इन सवालों के जवाब नेताओ के पास नही होंगे क्योंकि उनको तो शासन करने की लत लगी है उन्हें क्या फर्क पड़ता है कि बंगाल में कितनी आग लगी है।कोहराम मचा कर वो मतदातों को अपनी तरफ करना चाहते हैं लेकिन की परेशानियों से उन्हें कोई दरकार नहीं। ऐसे में वो जानते हैं कि ये जनता उनका वोट बैंक ही मात्र है जो हमारा है वो तो साथ है ही जो नही है बस उसी को तो ये सब दिखा डर कायम कर रहे हैं।

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