कांग्रेस से कहाँ चूक हुई,....हार पर विचार होना ज़रूरी...
खास रिपोर्ट--- रज़िया बानो खान........

 


 

एक दौर था जब कांग्रेस पार्टी को 2004 में अकेले दम पर मिली 145 सीट के बल पर उसकी यूपीए की सरकार बनी।उसके बाद 2009 में कांग्रेस का आंकड़ा 200 के पार गया फिर दोबारा यूपीए की सरकार बनी लेकिन 2014 के चुनाव से पड़ा उसका सीटों का पतझड़ 2019 में भी हरियाली का रूप नही ले पाया,.....आखिर ऐसा क्यों ये कांग्रेस पार्टी के लिए सोचने का विषय है। 2014 में भी कांग्रेस की कमान सोनिया गांधी के हाथों में थी लेकिन 2004 और 2009 के उनके कार्यकाल के दौरान जो महंगाई और घोटाले उजागर हुये।उसने कांग्रेस की बुनियाद हिला डाली जिसका परिणाम 2014 के लोक सभा चुनाव में देखने को मिला।उसके खाते में सिर्फ और सिर्फ 44 सीटें ही आई हां यहां एक बात जरूर है कि 2019 में उसकी सीटें 2014 के मुकाबले बढ़ी लेकिन उतनी नही जितनी मेहनत कांग्रेस पार्टी ने की थी और जिस वजह से वो फिर एक बार विपक्ष में बैठने को बाध्य हो गई।

 

अब मंथन इस बात का होना चाहिए कि कांग्रेस पार्टी की स्थिति इस चुनाव में इतनी खराब क्यों रही जबकि चुनावी समर में ऐसा तो नही प्रतीत होता था।तो इसकी एक मुख्य वजह ये है कि कांग्रेस के नेता देश के जज़्बात को समझने में नाकाम रहे,.....जिसका सीधा फायदा भाजपा ने लिया।कांग्रेसी नेता की भाषा इतनी निम्न स्तरीय हो गई कि जनता भी उनसे आजिज आने लगी और रही सही कसर काश्मीर के मसले पर उनके ढुलमुल रवैये ने निकाल दी। उनका बस चलता तो कश्मीर के अलगाववादी नेताओं को घर दामाद तक बना लेते अरे जो काम मोदी सरकार ने किया क्या वो आप नही कर सकते थे आपको रोका किसने था।

 

तीसरी और सबसे अहम बात कि पाकिस्तान के साथ आपकी जवाबी कार्यवाही कैसी दिखती है जब भाजपा ने सर्जिकल स्ट्राइक किया। तो देश को बताया और दिखाया लेकिन आपने उसका मजाक उड़ाया और बाद में कहा कि हमारे समय मे भी सर्जिकल स्ट्राइक हुई थी। लेकिन कभी हमने जाहिर नही किया,.....अरे राहुल जी आपने जाहिर क्यों नही किया।देश का हर व्यक्ति जानना चाहता है ना कि पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब भारत दे रहा है या नही आप भी दिखाते और चुनावी मौसम में उसको भुनाते।लेकिन आपने नही किया जिसका गुस्सा भी जनता ने आप पर उतारा और सबसे अहम बात आपको जब पता है कि प्रियंका गांधी आपकी पार्टी के लिए कारगर हैं।तो आप उन्हें पार्टी से हमेशा के लिए क्यों नही जोड़ते क्यों उन्हें चुनावी समर में बुलाकर जनता के बीच भुनाने की कोशिश करते है।अरे जनता उनको मानती है इसमें कोई संदेह नही लेकिन वो जिनके लिए वोट मांगती हैं उनका तो रिकार्ड पहले से ही जनता के आगे खराब है तो जनता दोबारा वही गलती क्यों करे आप ही बताइए।

 

राहुल जी जो सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि आप अध्यक्ष पद छोड़ना चाहते हैं। क्या ये सही है अगर हां तो ऐसा करके आप क्या दिखाना चाहते है कि आपमे वो कूबत ही नही जो राष्ट्रीय पार्टी को पुराना सम्मान दिला सकें।अगर ऐसा ही है तो अध्यक्ष पद लिया ही क्यों था आपने आप प्रियंका को ही अध्यक्ष बनवा देते।कांग्रेस पार्टी आपके परिवार के नाम से ज्यादा जानी जाती है कम से कम उसकी आन बान और शान की तो हिफाज़त कीजिये।राजनीती आपके खून में है उसे महसूस कीजिये जनता के बीच जाइये मुद्दे वाजिब तलाशिये और सटीक हमला कीजिये फिर बाज़ी पलटते देर कहाँ लगती है।आपको बता दे बाबू जनता को जैसे अपने परिवार के प्रत्येक सदस्य यानि अपने बीवी बच्चों से प्यार होता है वैसे ही हिंदुस्तान की भोली भली जनता को भारत माता कही जाने वाली मात्रृ भूमि अपने देश से भी उतनी ही मोहब्बत है जिसे बीजेपी ने बखूबी समझा और आम जनता से जुड़े सारे मुद्दों को दरकिनार कर राष्ट्रवाद का कार्ड खेल अपनी जीत का बिगुल फुंका। 

                                  ये जो पब्लिक है सब जानती है बाबू..........!!!!! 

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